Source: 
Navbharat Times
Author: 
Date: 
02.02.2022
City: 
Lucknow

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (uttarpradesh vidhansabha chunav) 2022 से जुड़ी एडीआर की रिपोर्ट (adr report) में राजनीतिक दलों के करोड़पति उम्मीदवारों (Rich Candidate) से लेकर आपराधिक छवि (Criminal Candidate) वालों का भी खुलासा हुआ है। यूपी चुनाव (UP Chunav) के पहले चरण में ऐसे उम्मीदवार भी हैं, जिसके पास एक-दो करोड़ नहीं बल्कि 148 करोड़ की संपत्ति है। करोड़पति उम्मीदवारों की लिस्ट में बीजेपी के बाद बसपा और सपा के उम्मीदवार शामिल हैं। उत्तर प्रदेश इलेक्शन वॉच एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण में 623 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसमें करीब 615 उम्मीदवारों के शपथ पत्र को जांच लिया गया है, जो 58 निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ रहे हैं। इसमें 280 करोड़पति उम्मीदवार हैं।

100 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति के मालिक उम्मीदवार
एडीआर की रिपोर्ट (Association for Democratic Reforms) में पहले चरण के प्रत्याशियों में बीजेपी के टिकट पर मेरठ कैंट से चुनाव लड़ रहे अमित अग्रवाल के पास 148 करोड़ रूपये की संपत्ति है। इसी तरह से मथुरा से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे एसके शर्मा के पास 112 करोड़ रूपये की संपत्ति है। बुलंदशहर के सिकंदराबाद विधानसभा से समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे राहुल यादव के पास 100 करोड़ रुपए की संपत्ति हैं।

यूपी चुनाव में करोड़पति प्रत्याशियों का बोलबाला
रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण के चुनाव में 615 प्रत्याशियों में 280 करोड़पति है। करोड़पति प्रत्याशियों की लिस्ट में बीजेपी टॉप पर है। बीजेपी के 57 में 55 प्रत्याशी करोड़पति है। कांग्रेस के 58 में 32 करोड़पति हैं। बसपा के 56 में 50 और समाजवादी पार्टी के 28 में 23 प्रत्याशी करोड़पति है। वहीं सपा की साथी आरएलडी के 29 में 28 उम्मीदवार करोड़पति है। वहीं यूपी चुनाव में अपनी जमीन तलाश रही आम आदमी पार्टी के आप के 52 में 22 प्रत्याशी करोड़पति है।

औसत संपत्ति के मालमे में सपा के उम्मीदवार नंबर वन
पहले चरण के उम्मीदवारों की औसतन संपत्ति उत्तर 3.72 करोड़ है। मुख्य दलों में समाजवादी पार्टी के 28 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 13.23 करोड़ है। बीजेपी के 57 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 12.01 करोड़ है। आरएलडी के 29 उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 8.32 करोड़ है। बसपा के 56 उम्मीदवारों की संपत्ति 7.71 करोड़ है। कांग्रेस के उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 3.08 करोड़ है। आम आदमी पार्टी (आप) के 52 उम्मीदवारों की संपत्ति 1.12 करोड़ है।

उम्मीदवारों का आपराधिक रिकॉर्ड
रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण के चुनाव में 156 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज है। समाजवादी पार्टी (Samajwadi party) के 28 में से 21 उम्मीदवार पर आपराधिक मुकदमें दर्ज हैं। वहीं आरएलडी के 29 में से 17 उम्मीदवारों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। बीजेपी (bjp) के 57 प्रत्याशियों में से 29 प्रत्याशियों पर केस दर्ज हैं। बसपा के 56 प्रत्याशियों में से 19 प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। आम आदमी पार्टी के 52 में से 15 प्रत्याशियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वहीं कांग्रेस के 58 प्रत्याशियों में से 21 प्रत्याशियों आपराधिक केस दर्ज हैं। जानकारी के मुताबिक सभी पार्टी को मिलाकर उनके 12 उम्मीदवारों महिला संबंधी अपराध से जुड़े केस और 6 प्रत्याशियों पर हत्या जैसे गंभीर अपराध के मामले चल रहे हैं।

शिक्षा के मामले में उम्मीदवार
शिक्षा के मामले में 39 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता 5वीं से 12वीं के बीच घोषित की है। 49 प्रतिशत उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षणिक योग्यता स्नातक और इससे ज्यादा घोषित की है। 38 उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षणिक योग्यता साक्षर बताया है। वहीं 15 प्रतिशत उम्मीदवारों ने खुद को अनपढ़ बताया है। वहीं 12 उम्मीदवारों ने अपनी शैक्षिक योग्यता घोषित ही नहीं की है। उत्तर प्रदेश विधानसभा के पहले चरण के उम्मीदवारों में 12 प्रतिशत महिला उम्मीदवार है, यानी 74 महिला इस बार चुनाव मैदान में है।

पहले चरण में 53 निर्वाचन क्षेत्र संवेदनशील
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 के पहले चरण में 58 में से 31 (53%) संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्र हैं। जहां 3 या उससे अधिक उम्मीदवारों ने अपने ऊपर गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। यूपी विधानसभा चुनाव के पहले चरण में उम्मीदवारों के चयन में राजनीतिक दलों द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता दिखा। राजनीतिक दलों ने फिर से आपराधिक मामले वाले 25% उम्मीदवारों को टिकट देने की अपनी पुरानी प्रथा को ही दोहराया है।सभी प्रमुख दलों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित करने वाले 15%-75% उम्मीदवारों को टिकट दिए हैं। जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने 13 फरवरी 2020 के अपने निर्देश में विशेष रूप से राजनीतिक दलों को आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को चुनने और साफ छवि वाले उम्मीदवारों को टिकट नहीं देने का कारण बताने का निर्देश दिया था।

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