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Source
Amar Ujala
Author
Devesh Tripathi
Date
City
New Delhi

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में कई क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की आय में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, अनेक दलों ने अपनी कमाई से ज्यादा राशि खर्च की। स्वैच्छिक चंदा आय का प्रमुख स्रोत रहा, जबकि कुछ दलों ने पर्याप्त बचत भी दर्ज की। संस्था ने राजनीतिक दलों की वित्तीय पारदर्शिता पर चिंता जताते हुए बताया कि कई प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों ने तय समय सीमा के बाद भी अपनी ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की। देश के क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की संयुक्त आय में वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान पिछले वर्ष की तुलना में 51.57 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इस अवधि में 36 क्षेत्रीय दलों की कुल कमाई घटकर 1,192.94 करोड़ रुपये रह गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष (2023-24) में 2,463.17 करोड़ रुपये थी। चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाली संस्था लोकतांत्रिक सुधार संघ (एडीआर) ने बुधवार को जारी अपनी नवीनतम रिपोर्ट में यह चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। हैरानी की बात है कि कम कमाई के बावजूद इन दलों का कुल खर्च आय से 20 फीसदी अधिक यानी 1,433.07 करोड़ रुपये रहा। कुल 36 में से 21 दलों ने अपनी कमाई से ज्यादा पैसा खर्च किया। समाजवादी पार्टी (सपा), बीआरएस, बीजद, जदयू और तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) समेत 21 क्षेत्रीय दलों ने अपनी कमाई से ज्यादा खर्च किया है। एडीआर के विश्लेषण में चौंकाने वाला दावा एडीआर ने यह विश्लेषण चुनाव आयोग (ईसीआई) की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध 36 क्षेत्रीय दलों के ऑडिट खातों के आधार पर तैयार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक वाईएसआर कांग्रेस ने अपनी आय से सबसे ज्यादा यानी 142.33% (199.82 करोड़ रुपये) अधिक खर्च किया। वहीं, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) 228.31 करोड़ रुपये की कमाई के साथ सबसे अमीर क्षेत्रीय दल रही। इसने 166.98 करोड़ रुपये का बचत भी रखा। दलों की कुल आय का 58.88% हिस्सा (702.36 करोड़ रुपये) स्वैच्छिक चंदे से आया, जिसमें एआईटीसी 184.08 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर रही। डीएमके, शिवसेना समेत 31 दलों ने नहीं दी जानकारी एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में राजनीतिक पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंता जाहिर की है। संस्था ने बयान में कहा कि कुल 67 मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय दलों में से 31 दलों ने निर्धारित समय सीमा (31 अक्तूबर 2025) बीतने के 207 दिन बाद भी अपनी ऑडिट रिपोर्ट चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड नहीं की है। इन डिफॉल्टरों में द्रमुक (डीएमके), शिवसेना, एनसीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस जैसे बड़े नाम शामिल हैं। एडीआर ने अपने प्लेटफॉर्म से सिफारिश की है कि वित्तीय खुलासे के नियमों को कड़ा किया जाए और ऑडिट रिपोर्ट में देरी करने वाले दलों पर सख्त जुर्माना लगाया जाए।


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