डीके शिवकुमार 1413 करोड़ के साथ सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं। ADR रिपोर्ट 2026 में 31 मुख्यमंत्रियों की संपत्ति और अपराध का सच खुला है। औसत संपत्ति 118 करोड़ रुपए है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- देश के 45 प्रतिशत मुख्यमंत्रियों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
- लगभग 35 प्रतिशत मुख्यमंत्रियों पर हत्या का प्रयास जैसे गंभीर केस हैं।
- मुख्यमंत्रियों की औसत संपत्ति 118.07 करोड़ रुपए आंकी गई है।
- डीके शिवकुमार 1413 करोड़ की संपत्ति के साथ सबसे अमीर हैं।
- देश के शीर्ष नेतृत्व में केवल एक महिला मुख्यमंत्री शामिल है।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने एक नई रिपोर्ट जारी की है। इसमें देशभर के 31 मुख्यमंत्रियों के शपथपत्रों का बारीकी से विश्लेषण हुआ है।
यह डेटा हमारे लोकतंत्र की सेहत को समझने के लिए जरूरी है। मतदाता को पता होना चाहिए कि उनका नेतृत्व कौन कर रहा है। सत्ता के शिखर पर बैठे लोगों की पारदर्शिता बहुत जरूरी है।
यह रिपोर्ट कार्ड चुनावी सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे पता चलता है कि राजनीति में धन कितना हावी है। अपराधीकरण के आंकड़े भी जनता के सामने एक बड़ी चुनौती हैं।
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धनकुबेर बनाम सामान्य संपत्ति वाले मुख्यमंत्री
भारतीय राजनीति में संपत्ति का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। चुनाव लड़ने के लिए अब करोड़ों रुपए की जरूरत होती है। ADR रिपोर्ट के अनुसार 13 प्रतिशत मुख्यमंत्री अरबपति की श्रेणी में हैं।
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सबसे अमीर मुख्यमंत्री
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सूची में सबसे ऊपर हैं। उनकी कुल संपत्ति 1413 करोड़ रुपए से अधिक है। उनके ऊपर 265 करोड़ रुपए से ज्यादा की देनदारी भी है।
दूसरे नंबर पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू हैं। उनकी संपत्ति 931 करोड़ रुपए से ज्यादा दर्ज की गई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय भी 648 करोड़ के साथ अमीर हैं।
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सबसे कम संपत्ति वाले मुख्यमंत्री
कुछ मुख्यमंत्री ऐसे भी हैं, जिनकी संपत्ति बहुत कम है। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सबसे नीचे हैं। उनके पास केवल 55 लाख रुपए की संपत्ति है। पश्चिम बंगाल के सुवेंदु अधिकारी के पास 85 लाख रुपए हैं। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के पास 1.46 करोड़ रुपए ही हैं।
औसत मुख्यमंत्री के पास 118 करोड़ की संपत्ति है। यह एक आम नागरिक की कमाई से बहुत अधिक है। सबसे अमीर और गरीब मुख्यमंत्री के बीच बहुत बड़ा अंतर है। अब हम मुख्यमंत्रियों के आपराधिक रिकॉर्ड की हकीकत जानेंगे।
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दागदार दामन: आपराधिक मामलों का सच
जन प्रतिनिधियों पर दर्ज मामले शासन की छवि खराब करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 31 में से 14 मुख्यमंत्रियों पर केस हैं। यह कुल संख्या का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा है। गंभीर आपराधिक मामलों की बात करें तो 11 मुख्यमंत्री इसकी जद में हैं। इनमें हत्या का प्रयास और रिश्वतखोरी जैसे संगीन आरोप शामिल हैं।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी पर सबसे अधिक केस हैं। उन पर कुल 89 आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें 72 मामले गंभीर आईपीसी धाराओं के तहत दर्ज हैं।
आपराधिक धमकी से जुड़े मामले भी कई मुख्यमंत्रियों पर दर्ज हैं। राजनीति का अपराधीकरण लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है। सार्वजनिक शांति भंग करने के आरोप भी शासन व्यवस्था को हिलाते हैं।
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विशेष विश्लेषण: एमपी, राजस्थान और सीजी
हिंदी पट्टी के तीन प्रमुख राज्यों की स्थिति काफी रोचक है। यहां के मुख्यमंत्रियों की वित्तीय और शैक्षिक स्थिति अलग-अलग है। मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव काफी समृद्ध श्रेणी में आते हैं।
उनकी कुल संपत्ति 42 करोड़ रुपए से अधिक है। उनके पास 8 करोड़ रुपए की देनदारी भी है। वह शैक्षिक रूप से काफी योग्य नेता हैं। उनके पास शिक्षा के क्षेत्र में डॉक्टरेट की डिग्री है।
राजस्थान मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा कम संपत्ति वाले नेताओं में शामिल हैं। उनकी कुल संपत्ति 1.46 करोड़ रुपए के करीब है। उन पर 46 लाख रुपए का कर्ज भी है। उन्होंने परास्नातक (Post Graduate) तक की शिक्षा प्राप्त की है।
छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की आर्थिक स्थिति साधारण है। उनकी कुल संपत्ति 3 करोड़ रुपए से कुछ ज्यादा है। वह शैक्षिक रूप से केवल 10वीं पास हैं। उनके पास 65 लाख रुपए की देनदारियां भी मौजूद हैं। इन राज्यों में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री सबसे अमीर और शिक्षित हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री की शैक्षणिक योग्यता सबसे कम है।
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शिक्षा, उम्र और जेंडर की स्थिति
मुख्यमंत्रियों की उम्र और शिक्षा का ढांचा भी विविधतापूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार अधिकतर मुख्यमंत्री 51 से 60 वर्ष के बीच हैं। शिक्षा का स्तर 3 मुख्यमंत्रियों के पास डॉक्टरेट की उच्च डिग्री है।
9 मुख्यमंत्री पोस्ट ग्रेजुएट यानी परास्नातक स्तर तक पढ़े हैं। 7 मुख्यमंत्री साधारण ग्रेजुएट हैं। 6 मुख्यमंत्रियों के पास प्रोफेशनल ग्रेजुएट डिग्री है। 2 मुख्यमंत्री केवल 10वीं पास हैं।
महिला प्रतिनिधित्व लैंगिक समानता के मामले में आंकड़े बहुत निराशाजनक हैं। 31 मुख्यमंत्रियों में केवल 1 महिला मुख्यमंत्री है। यह कुल संख्या का मात्र 3 प्रतिशत हिस्सा है।
दिल्ली की रेखा गुप्ता ही इस सूची में एकमात्र महिला हैं। 30 राज्यों में केवल पुरुष मुख्यमंत्री होना एक बड़ी बाधा है। यह दिखाता है कि राजनीति के शीर्ष पर महिलाएं बहुत पीछे हैं। 97 प्रतिशत नेतृत्व पुरुषों के हाथ में होना चिंताजनक है।
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